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मुहूर्त योग 2026

ज्वालामुखी योग तिथियां 2026: बचने के दिन

ज्वालामुखी का अर्थ है ज्वालामुखी का मुख, और यह बचने योग्य योग है। यहां 2026 में इसकी सभी 7 तिथियां, योग बनने के नियम और इसमें क्या न शुरू करें, दिया गया है।

2026 में ज्वालामुखी योग की सभी तिथियां

तारीखवार
ये तिथियां भारत (IST) के लिए परिकलित हैं। पंचांग का दिन सूर्योदय से आरंभ होता है, इसलिए अन्य समय क्षेत्रों में यही योग पड़ोसी तारीख को पड़ सकता है। अपने शहर के लिए इंटरैक्टिव कैलेंडर देखें।

ज्वालामुखी योग क्या है?

ज्वालामुखी एक अशुभ मुहूर्त योग है। यह पांच तिथि-नक्षत्र जोड़ों से बनता है: प्रतिपदा के साथ मूल, पंचमी के साथ भरणी, अष्टमी के साथ कृत्तिका, नवमी के साथ रोहिणी और दशमी के साथ आश्लेषा। मान्यता है कि इस योग में शुरू किया गया कोई भी कार्य, विवाह से लेकर नए व्यापार तक, सफल होने में संघर्ष करता है, इसलिए इसमें कोई नई शुरुआत नहीं रखी जाती।

ज्वालामुखी योग कैसे बनता है

प्रतिपदा + मूलपंचमी + भरणीअष्टमी + कृत्तिकानवमी + रोहिणीदशमी + आश्लेषा

पुष्कर योगों से अलग, ज्वालामुखी वार पर निर्भर नहीं करता, केवल पंचांग के दिन में तिथि और नक्षत्र के जोड़े के मेल पर निर्भर करता है।

ज्वालामुखी योग में क्या न करें

  • विवाह या सगाई नहीं
  • नए व्यापार की शुरुआत नहीं
  • संपत्ति या वाहन की खरीद नहीं
  • गृह प्रवेश या यात्रा की शुरुआत नहीं

रोज़मर्रा के कार्य ठीक हैं। सावधानी केवल महत्वपूर्ण नई शुरुआत के लिए है। यदि तिथि टालना संभव न हो तो दिन के सर्वोत्तम समय के लिए ज्योतिषी से परामर्श करें।

ये तिथियां कैसे निकाली गईं

नीचे दी गई प्रत्येक तिथि हमारे पंचांग इंजन से सूर्योदय आधारित वार मॉडल द्वारा परिकलित है: रात के समय तिथि-नक्षत्र का मेल पिछले सूर्योदय वाले दिन के वार से जुड़ता है, जैसा कि प्रकाशित पंचांगों में इन योगों की तिथियां दी जाती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ज्वालामुखी योग क्या है?
ज्वालामुखी एक अशुभ मुहूर्त योग है जो पांच तिथि-नक्षत्र जोड़ों से बनता है। इसमें नई शुरुआत से बचा जाता है।
2026 में कितने ज्वालामुखी योग हैं?
2026 में 7 ज्वालामुखी योग हैं: 24 फरवरी, 25 फरवरी, 22 मार्च, 25 अप्रैल, 2 सितंबर, 5 अक्टूबर और 9 दिसंबर (भारतीय तिथियां)।
क्या ज्वालामुखी योग में यात्रा कर सकते हैं?
ज्वालामुखी योग में महत्वपूर्ण यात्रा शुरू करने से बचना बेहतर है। यदि यात्रा टालना संभव न हो तो दिन में शुभ चौघड़िया या होरा चुनें।
ज्वालामुखी योग का विपरीत कौन सा योग है?
अमृत सिद्धि, सर्वार्थ सिद्धि, द्विपुष्कर और रवि योग जैसे शुभ योग नई शुरुआत के लिए पारंपरिक रूप से चुने जाते हैं।

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