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मुहूर्त योग 2026

द्विपुष्कर योग तिथियां 2026

द्विपुष्कर योग को दोगुना करने वाला कहा जाता है: मान्यता है कि इसमें आरंभ किया गया शुभ कार्य दोहराता है। यहां 2026 में इसकी सभी 7 तिथियां, योग बनने के नियम और इसका उपयोग दिया गया है।

2026 में द्विपुष्कर योग की सभी तिथियां

तारीखवार
ये तिथियां भारत (IST) के लिए परिकलित हैं। पंचांग का दिन सूर्योदय से आरंभ होता है, इसलिए अन्य समय क्षेत्रों में यही योग पड़ोसी तारीख को पड़ सकता है। अपने शहर के लिए इंटरैक्टिव कैलेंडर देखें।

द्विपुष्कर योग क्या है?

द्विपुष्कर एक शुभ मुहूर्त योग है। यह तब बनता है जब भद्रा तिथि, द्वितीया, सप्तमी या द्वादशी, रविवार, मंगलवार या शनिवार को पड़े और साथ में द्विपद नक्षत्रों, मृगशिरा, चित्रा या धनिष्ठा, में से कोई एक हो। मान्यता है कि इस योग में आरंभ किया गया कार्य दोहराता है, इसलिए खरीदारी और नए उद्यमों के लिए इसे चुना जाता है।

द्विपुष्कर योग कैसे बनता है

तिथि: द्वितीया, सप्तमी या द्वादशीवार: रविवार, मंगलवार या शनिवारनक्षत्र: मृगशिरा, चित्रा या धनिष्ठा

तीनों का मेल पंचांग के दिन में किसी समय होना चाहिए। पंचांग का दिन सूर्योदय से शुरू होता है, इसलिए रात के समय का मेल पिछले सूर्योदय वाले दिन में गिना जाता है, और पंचांग इसी आधार पर तिथि देते हैं।

द्विपुष्कर योग में क्या करें

जिन कार्यों को आप दोहराना या बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए द्विपुष्कर चुनें:

  • वाहन, संपत्ति, स्वर्ण या उपकरण की खरीद
  • व्यापार या नए उद्यम की शुरुआत
  • अनुबंध और समझौते
  • निवेश और आर्थिक शुरुआत

विवाह और गृह प्रवेश के लिए हमारे मुहूर्त कैलेंडर पर सभी मुहूर्त कारक देखें।

ये तिथियां कैसे निकाली गईं

नीचे दी गई प्रत्येक तिथि हमारे पंचांग इंजन से सूर्योदय आधारित वार मॉडल द्वारा परिकलित है: रात के समय तिथि-नक्षत्र का मेल पिछले सूर्योदय वाले दिन के वार से जुड़ता है, जैसा कि प्रकाशित पंचांगों में इन योगों की तिथियां दी जाती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

द्विपुष्कर योग क्या है?
द्विपुष्कर एक शुभ मुहूर्त योग है जो भद्रा तिथि (द्वितीया, सप्तमी, द्वादशी) के रविवार, मंगलवार या शनिवार को मृगशिरा, चित्रा या धनिष्ठा नक्षत्र के साथ पड़ने पर बनता है। इसमें शुरू कार्य के दोहराने की मान्यता है।
2026 में कितने द्विपुष्कर योग हैं?
2026 में 7 द्विपुष्कर योग हैं: 20 जनवरी, 16 मार्च, 24 मार्च, 7 जून, 9 अगस्त, 11 अक्टूबर और 5 दिसंबर (भारतीय तिथियां)।
द्विपुष्कर योग में क्या करना चाहिए?
खरीदारी, निवेश, व्यापार की शुरुआत, अनुबंध और समझौते, यानी वे कार्य जिन्हें आप दोहराना या दोगुना देखना चाहते हैं।
क्या द्विपुष्कर योग विवाह के लिए शुभ है?
यह सामान्यतः शुभ है, पर विवाह के लिए संपूर्ण विवाह मुहूर्त कारक चाहिए: तिथि, वार, नक्षत्र, लग्न और गुरु-शुक्र अस्त से मुक्ति। अपने शहर के लिए मुहूर्त फाइंडर देखें।
वेबसाइटों में द्विपुष्कर तिथियां क्यों अलग होती हैं?
क्योंकि पंचांग का दिन मध्यरात्रि से नहीं, सूर्योदय से शुरू होता है। रात का मेल पिछले सूर्योदय वाले दिन का होता है। मध्यरात्रि आधारित गणना वाली साइटें पड़ोसी तारीख दे सकती हैं। हमारी सूची पंचांगों वाले सूर्योदय मॉडल पर है।

और जानें

अपने शहर के लिए मुहूर्त चाहिए?

हमारा इंटरैक्टिव मुहूर्त कैलेंडर विवाह, वाहन, गृह प्रवेश आदि के लिए हर दिन का स्कोर देता है, आपके स्थान और समय क्षेत्र के अनुसार।

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